आठ महीने के बच्चे पर झपटा गुलदार , वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा
हल्द्वानी और उसके आसपास के इलाकों में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है , फतेहपुर रेंज के गुजरौड़ा गांव में कल गुलदार ने दो बच्चों पर
हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, सुबह एक 15 साल की बच्ची पर पहले गुलदार ने हमला किया उसके बाद शाम को फिर गुलदार ने एक 8 महीने बच्चे पर हमला कर दिया , ग्रामीणों के शोर मचाने के बाद गुलदार ने घायल बच्चों को वहीं छोड़ दिया, जिसके बाद बच्चों को इलाज के लिए हल्द्वानी के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि 8 महीने के बच्चे को इलाज के लिए हल्द्वानी से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है, घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने आज फ़तेहपुर रेंज कार्यालय के गेट पर तालाबंदी और प्रदर्शन कर आदमखोर गुलदार को मारने की मांग की है ,वन विभाग के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते ग्रामीणों का आक्रोश इस बात का गवाह है की गुलदार के आतंक से ग्रामीण कितने खौफ़जदा हैं, कल हुई घटना से पहले गुलदार करीब 6 लोंगो पर हमला कर चुका है , लेकिन वन विभाग ने कोई कार्यवाही नही की, कल जब गुलदार ने 2 बच्चो पर जानलेवा हमला किया तो घटना से आक्रोशित ग्रामीणों से वन विभाग से गुलदार को मारने की मांग उठाई, उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी की यदि वह विभाग गुलदार को नही मारेगा तो ग्रामीणों को गुलदार को मारने की इजाज़त दे दी जाये, ग्रामीणों का आरोप है की डीएफओ को कई बार गुलदार की घटनाओं से अवगत कराने के बावजूद भी डीएफओ ने घटना का संज्ञान नही लिया ,जिससे क्षेत्र के लोगों में बहुत आक्रोश है । पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीरज तिवारी ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे पहले भी 6 लोगों को गुलदार हमला कर चुका है लेकिन वन बिभाग के अधिकारी असंवेदनशील बने हुए हैं , जबकि गुजरौड़ा ग्राम सभा की प्रधान रितु जोशी ने कहा कि वन विभाग यदि गुलदार को नही मार पा रहा है तो हमें बताएं और अनुमति दे दे ताकि हम खुद अपने स्तर से कार्यवाही कर सकें ।
घटना से आक्रोशित ग्रामीण आज रेंज ऑफ़िस गेट पर तालाबंदी करने पहुंचे, उन्होंने डीएफओ से मिलने की बात कही लेकिन डीएफओ नही पहुंचे, फतेहपुर वन रेंज अधिकारी के मुताबिक गुलदार को पकड़ने के लिए 8 कैमरे और 2 पिजरे भी लगाये गये हैं, और कोशिश की जा रही है की जल्द से जल्द गुलदार को पकड़ा जा सके।गुलदार दिन प्रतिदिन रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, इसका मतलब यह साफ हुआ कि जंगलों में मानव हस्तक्षेप इस कदर बढ़ गया है कि वन्य जीव अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं , अब देखना होगा कि संवेदनहीन बना वन बिभाग कब तक इस मामले पर कार्यवाही करता है ।