हल्द्वानी – आखिर कहा गई रिंग रोड ?

त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुमाऊं क्षेत्र के हल्द्वानी के लिए की गई रिंग रोड की घोषणा उनके कार्यकाल के साढ़े 3 साल के बाद भी परवान नहीं चढ़ पाई है, दरअसल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की बागडोर संभालते ही अपने पहले दौरे में हल्द्वानी शहर के चारों तरफ से ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए रिंग रोड बनाए जाने की घोषणा की थी, 400 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई रिंग रोड कागजों में ही 1000 करोड़ तक पहुंची और उसके बाद केंद्रीय परिवहन मंत्री द्वारा इसे राष्ट्रीय योजना में शामिल करने का आश्वासन भी दिया गया ,लेकिन अब मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को रिंग रोड के लिये पूरा बजट देने की मांग की है, कुमाऊं क्षेत्र में बेहतर यातायात की व्यवस्था के लिए रिंग रोड का सपना दिखाकर सरकार और अधिकारी चुप्पी साध गए, लिहाजा सरकार के साढ़े 3 साल पूरे होने वाले हैं और रिंग रोड का कहीं अता पता नहीं है, यह कब बनेगी, किधर से होकर गुजरेगी इसका कोई अता पता नही है, 2022 का मिशन नजदीक है लिहाज़ा रिंग रोड को चुनावी मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है ,कांग्रेस प्रवक्ता दीपक बलुटिया ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा की जितनी घोषणायें सीएम कर रहे है उनमें से एक भी धरातल पर नही उतर रही हैं, उसकी वजह यह है की डबल इंजन के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार जनता को बेवकूफ बना रही है, जबकी हक़ीक़त यह है की राज्य और केंद्र दोंनो सरकारों के पास पैसा नही है, या फिर सीएम का केंद्र सरकार से तालमेल ठीक नही है। लिहाज़ा सर्वे तो छोड़िए कागज़ों में भी रिंग रोड का नाम है या नही इस पर भी यकीन करना मुश्किल है। उधर समाजवादी पार्टी ने भी रिंग रोड को केवल जुमला करार दिया है, सपा के प्रदेश सचिव शोएब अहमद ने कहा कि बीजेपी कागजों में भी अपने काम को नहीं दिखा पा रही है धरातल की तो बात ही छोड़िए, लिहाजा बीजेपी की सारी योजनाएं जुमला साबित हो रही है, इसलिए कि हल्द्वानी की रिंग रोड तो क्या अन्य विकास योजनाओं को भी जुमला ही करार देना चाहिए।