हल्द्वानी में अब नही होगी पेय जल की किल्लत, डी पी आर शासन को भेजी

हल्द्वानी जमरानी बांध जैसी महत्त्वपूर्ण योजना को जल्द ही पंख लग सकते हैं, पर्यावरणीय स्वीकृति की मंजूरी मिलने से परियोजना का काम जल्दी आगे बढ़ सकता है। जिस बांध को करीब 44 साल पहले 61 करोड़ में बनना था आज उसी परियोजन की लागत 2600 करोड़ के आसपास पहुँच गयी है, जिसके लिए जामरानी बांध से लेकर हल्द्वानी के अलग अलग कोनों में 116 किमी लम्बी पाइप लाइन डाली जायेगी ।
जमरानी बांध परियोजना एक नज़र में-
1975 में बांध निर्माण की स्वीकृति,
करीब 9 किलोमीटर की लंबाई में 130 मीटर ऊँचा और 480 मीटर चौड़ा बांध,
45 साल पहले बांध की लागत 61करोड़
वर्तमान में बांध परियोजना की लागत 2600 करोड़ के आसपास, यानी 45 सालो में लागत 39 गुना बढ़ गयी,जामरानी बांध के निर्माण से उत्तराखण्ड को करीब 9458 हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश को 47607 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिचाई की सुविधा मिलेगी, इस बांध से 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी प्रस्तावित है, जबकि उत्तराखण्ड को 52 क्यूबिक मीटर पानी भी पेयजल के लिए मिल सकेगा, वही उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड को 57 और 43 के अनुपात में पानी बटेगा, उम्मीद है की इस परियोजना से पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आएगी, पेयजल निगम जिस ” जामरानी बांध पेयजल योजना” की डीपीआर जल निगम मुख्यालय को भेज चुका है उसके तहत डैम से लेकर मुख्य वाटर टैंक तक करीब 16 किमी की पाइप लाइन डलेगी, जिसके बाद अन्य 95 किमी की पाइपलाइन मुख्य वाटर टैंक से हलद्वानी के अलग अलग करीब 55 वाटर टैंक से होकर गुजरेगी ।

पेय जल निगम के अधिशाषी अभियंता अशोक कटारिया के मुताबिक जमरानी बांध पेयजल परियोजना प्रोजेक्ट के तहत हल्द्वानी शहर को 6 जोन में विभाजित किया गया है, इस परियोजना के तहत अगले 30 वर्षों में हल्द्वानी की करीब 10 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने पर प्लान किया जा रहा है, जिससे आने वाले 30 सालों में हल्द्वानी की जनता को पर्याप्त पीने का पानी मिल सके और पानी की किल्लत ना हो। इस योजना में पुराने 55 टैंकों के अलावा 12 नए वाटर टैंक बनाने का प्रस्ताव भी जल निगम मुख्यालय को भेजा गया है।